कम सैलरी वालों को ज्यादा पेंशन कैसे मिलेगी? EPFO की हायर पेंशन स्कीम

कम सैलरी वालों को ज्यादा पेंशन कैसे मिलेगी? EPFO की हायर पेंशन स्कीम

रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर कर्मचारी का सबसे बड़ा चिंता का विषय होती है। इसी जरूरत को देखते हुए, Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने “हायर पेंशन स्कीम” का विकल्प शुरू किया था। यह योजना खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी जिनकी बेसिक सैलरी ₹15,000 से ज्यादा है लेकिन जिनकी पेंशन ₹15,000 की सीमा पर रुक जाती थी। आइए समझते हैं कि यह स्कीम कैसे काम करती है और इससे कौन लोग सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।

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हायर पेंशन स्कीम क्या है?

आम तौर पर, Employees’ Pension Scheme (EPS-95) के अंतर्गत पेंशन की गणना अधिकतम ₹15,000 के “पेंशन योग्य वेतन” (Pensionable Salary) पर की जाती थी। यानी चाहे आपकी सैलरी ₹50,000 हो या ₹80,000, पेंशन गिनने के लिए केवल ₹15,000 ही माना जाता था, जिससे अंतिम पेंशन राशि सीमित हो जाती थी।

EPFO की “हायर पेंशन स्कीम” के तहत कर्मचारी अपने वास्तविक वेतन (Basic Pay + DA) के आधार पर पेंशन योगदान कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी ₹50,000 का वेतन पा रहा है, तो उसकी पेंशन अब ₹50,000 पर आधारित हो सकती है, जिससे अंतिम पेंशन राशि कई गुना बढ़ जाएगी।

पेंशन की गणना का नया फॉर्मूला

EPFO के अनुसार, पेंशन की गणना के लिए फॉर्मूला है:पेंशन राशि=पेंशन योग्य वेतन×पेंशन योग्य सेवा70पेंशन राशि=70पेंशन योग्य वेतन×पेंशन योग्य सेवा

यानी जैसे-जैसे “पेंशन योग्य वेतन” बढ़ेगा, वैसे-वैसे आपका मासिक पेंशन अमाउंट भी बढ़ता जाएगा।

योगदान में बदलाव

मौजूदा नियमों के तहत, नियोक्ता (Employer) कुल 12% वेतन EPF में जमा करता है। इस 12% में से पहले केवल ₹15,000 की सीमा के आधार पर 8.33% हिस्सा EPS में ट्रांसफर होता था।
अब हायर पेंशन स्कीम के तहत यह योगदान कर्मचारी के वास्तविक वेतन के आधार पर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कर्मचारी की सैलरी ₹30,000 है, तो नियोक्ता के योगदान का 8.33% यानी ₹2,499 (बजाय सिर्फ ₹1,249) EPS खाते में जाएगा।

इससे EPS फंड का बैलेंस बढ़ेगा और भविष्य की पेंशन रकम भी अनुपातिक रूप से बढ़ जाएगी।

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कम सैलरी वालों पर असर

यह स्कीम सुनने में जितनी आकर्षक लगती है, उतनी हर किसी के लिए उपयोगी नहीं। अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन पहले से ही ₹15,000 से कम था, तो उसके लिए यह नया विकल्प ज्यादा फर्क नहीं लाएगा। वो पहले से ही अपने पूरे वेतन पर योगदान कर रहा था।

दूसरी ओर, जो कर्मचारी ₹15,000 से अधिक कमाते थे लेकिन EPS योगदान सिर्फ ₹15,000 की सीमा पर करवाते थे, उनके लिए यह योजना बड़ा मौका थी। वे बकाया राशि (arrears) का भुगतान करके और higher salary बेसिस पर योगदान चुनकर अपनी पेंशन कई गुना बढ़ा सकते हैं।

कौन थे पात्र?

EPFO की गाइडलाइंस के अनुसार, हायर पेंशन स्कीम का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिला, जो इन शर्तों को पूरा करते थे:

  • आप 1 सितंबर 2014 या उससे पहले तक EPS-95 के सदस्य थे।
  • आप उस तारीख के बाद भी EPF से जुड़े रहे।
  • आपने और आपके नियोक्ता ने मिलकर हायर पे पर जॉइंट ऑप्शन (Joint Option) जमा किया।

इस योजना की आवेदन अंतिम तिथि 11 जुलाई 2023 तय की गई थी, जिसे आगे नहीं बढ़ाया गया।

लंबे समय में लाभ

जो कर्मचारी इस स्कीम में पात्र थे और उन्होंने जॉइंट ऑप्शन के जरिए योगदान बढ़ाया, उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन कई गुना बढ़ सकती है। जहां पहले किसी व्यक्ति को लगभग ₹7,500-₹8,000 मासिक पेंशन मिलती, वहीं हायर वेतन पर योगदान करने के बाद वही पेंशन ₹25,000 या उससे भी अधिक हो सकती है, यह उसकी सैलरी और सर्विस पीरियड पर निर्भर करता है।

क्या नुकसान भी हैं?

फ़ायदे के साथ कुछ सीमाएँ भी हैं:

  • हायर पेंशन चुनने पर कर्मचारियों को पुराना एरियर (retrospective difference) अपने EPF खाते से एडजस्ट करवाना पड़ता है।
  • EPF बैलेंस में तत्काल कमी आती है क्योंकि बड़ी रकम EPS में ट्रांसफर हो जाती है।
  • यह स्कीम केवल पुराने (pre-2014) सदस्यों तक सीमित थी, इसलिए नए कर्मचारियों को इसका फायदा नहीं मिलता।

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