PF में ₹5 लाख से ज्यादा जमा है? अब आपको टैक्स देना होगा, ऐसे बचें!

pf 5 lakh tax applied how to save

कई सैलरीड लोग इस सोच में रहते हैं कि Provident Fund (PF) में किया गया निवेश पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है। लेकिन अब ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। 1 अप्रैल 2021 से केंद्र सरकार ने एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत एक तय सीमा से ज्यादा PF योगदान पर मिलने वाला ब्याज अब टैक्स के दायरे में आता है।

यह भी देखें: PF Interest Rate: मिनटों में ऐसे चेक करें अपने पीएफ पर मिला ब्याज, ये है पूरा प्रोसेस

क्या बदला है नियम?

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यदि एक वित्तीय वर्ष में कर्मचारी का योगदान (Employee Contribution) ₹2.5 लाख से अधिक हो जाता है, तो उस अतिरिक्त राशि पर मिलने वाला ब्याज अब taxable income माना जाएगा।

  • निजी क्षेत्र के कर्मचारी (Private Sector Employees): आपके EPF में यदि सालाना योगदान ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो उस अतिरिक्त हिस्से पर मिलने वाला ब्याज इनकम टैक्स में जोड़ा जाएगा।
  • सरकारी कर्मचारी (Government Employees): जिनके नियोक्ता यानी सरकार उनके EPF में योगदान नहीं करती, उनके लिए यह सीमा ₹5 लाख प्रति वर्ष है। यह राहत सिर्फ उन्हीं पर लागू होगी जिनके PF अकाउंट में employer contribution नहीं है।

टैक्स कैलकुलेशन कैसे होता है?

आयकर विभाग ने इस नियम के तहत PF खातों को दो हिस्सों में विभाजित किया है:

  • Taxable Account: इसमें ₹2.5 लाख (या ₹5 लाख) से अधिक के योगदान पर मिलने वाला ब्याज जमा होता है।
  • Non-Taxable Account: इसमें सीमा के भीतर योगदान पर ब्याज जमा होता है, जो टैक्स-फ्री रहता है।

हर साल PF ब्याज दोनों हिस्सों में अलग-अलग तरीके से जोड़ा जाता है ताकि आपकी टैक्स योग्य आय स्पष्ट हो सके।

टैक्स से कैसे बचें?

सच कहा जाए तो इस नियम से पूरी तरह बचना संभव नहीं है क्योंकि यह आयकर कानून का हिस्सा है। लेकिन कुछ समझदारी से आप अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं:

  1. योगदान की समीक्षा करें:
    सालाना PF contribution पर नज़र रखें। अगर ऐसा लगता है कि आपका योगदान ₹2.5 लाख की सीमा को पार कर जाएगा, तो VPF (Voluntary Provident Fund) में अतिरिक्त जमा रोक सकते हैं या घटा सकते हैं।
  2. विकल्पों पर विचार करें:
    अपनी बचत को सिर्फ PF में सीमित न रखें। टैक्स बचाने और returns बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प चुनें:
    • PPF (Public Provident Fund): ₹1.5 लाख तक का सालाना निवेश पूरी तरह टैक्स-फ्री ब्याज देता है।
    • ELSS (Equity Linked Savings Scheme): Mutual Funds जो Section 80C के तहत टैक्स बचत देते हैं और equity returns भी प्रदान करते हैं।
    • NPS (National Pension System): इसमें Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 तक का अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट मिलता है।
  3. निकासी के समय सावधानी रखें:
    यदि आप 5 साल से पहले PF निकालते हैं, तो उस पर TDS कटता है। जिनकी कुल आय टैक्स योग्य सीमा से कम है, वे Form 15G या 15H (Senior Citizens के लिए) जमा करके TDS बचा सकते हैं।

क्यों लाया गया यह नियम?

सरकार का उद्देश्य यह था कि बहुत अधिक आय वाले लोग EPF का इस्तेमाल एक interest-bearing tax-free investment के रूप में न करें। PF का मूल उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत बनाना है, न कि अनलिमिटेड टैक्स-फ्री आय का साधन।

यह भी देखें: आपका PF कट रहा है? ऐसे पता करें कि कंपनी PF जमा कर रही है या नहीं।

क्या असर पड़ेगा सैलरीड लोगों पर?

आम वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए, जिनका सालाना PF योगदान ₹2.5 लाख से कम है, यह नियम किसी तरह का असर नहीं डालेगा। लेकिन उच्च आय वाले प्रोफेशनल्स — जैसे senior executives, corporate managers या ऐसे लोग जिनकी EPF deduction ज्यादा है, उन्हें अब ब्याज पर टैक्स देना होगा।

Leave a Comment