
कई लोग जब नौकरी बदलते हैं या किसी वजह से नौकरी छोड़ते हैं, तो सबसे पहले उनके दिमाग में एक सवाल आता है अपने PF यानी Provident Fund की निकासी कैसे की जाए और उस पर टैक्स (TDS) लगेगा या नहीं? अक्सर यही भ्रम लोगों को परेशान करता है कि अगर सेवा 5 साल से कम हुई तो क्या पूरे पैसे पर TDS लगेगा, या कुछ छूट भी है। चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
1. 5 साल की निरंतर सेवा हो तो कोई TDS नहीं
यदि किसी कर्मचारी ने 5 साल या उससे अधिक की लगातार सेवा पूरी की है, तो उसके EPF खाते की पूरी निकासी पर कोई TDS नहीं काटा जाता है, चाहे निकाली गई राशि कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
यह “continuous service” केवल एक ही कंपनी में जरूरी नहीं है, अगर आपने नौकरी बदली और हर बार PF ट्रांसफर करते रहे, तो सभी नियोक्ताओं की सेवा अवधि मिलाकर यह 5 साल की गिनती पूरी हो जाती है।
2. ₹50,000 से कम की निकासी पर भी राहत
अगर सेवा अवधि 5 साल से कम भी हो, फिर भी अगर आप अपने PF खाते से ₹50,000 से कम की राशि निकालते हैं, तो उस पर कोई TDS नहीं लगेगा। यह नियम उन लोगों के लिए खास राहत देता है जो किसी कारणवश छोटी-सी राशि निकालना चाहते हैं जैसे मेडिकल इमरजेंसी या अस्थायी आर्थिक जरूरत।
3. नियंत्रण से बाहर की स्थिति में भी छूट
कभी-कभी नौकरी समाप्ति ऐसी परिस्थितियों में होती है जो कर्मचारी के हाथ में नहीं होतीं। इन मामलों में भी EPF निकासी पर TDS नहीं लगाया जाता।
जैसे कि:
- खराब स्वास्थ्य या स्थायी विकलांगता।
- कंपनी द्वारा व्यवसाय बंद कर देना।
- कोई विशेष प्रोजेक्ट पूरा हो जाना या संगठन का रीलोकेशन होना।
ऐसी परिस्थिति में कर्मचारी को टैक्स छूट का लाभ मिलता है, क्योंकि यह निर्णय उसके नियंत्रण के बाहर होता है।
4. Form 15G या 15H जमा करने का फायदा
यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम है, तो आप Form 15G (non-senior citizen के लिए) या Form 15H (senior citizen के लिए) जमा करके TDS कटने से बच सकते हैं। ये फॉर्म एक self-declaration होते हैं कि आपकी कुल आय इतनी नहीं है कि उस पर टैक्स देना पड़े।
आप इन्हें EPFO की वेबसाइट से ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं या अपने क्षेत्रीय EPF कार्यालय में ऑफलाइन भी जमा कर सकते हैं। ध्यान रखें, यह TDS से राहत देता है, लेकिन अगर बाद में आपकी कुल आय टैक्स-योग्य हो जाती है, तो ITR दाखिल करते समय उस पर टैक्स देना अनिवार्य रहेगा।
5. PF ट्रांसफर पर TDS नहीं लगता
अगर आपने नौकरी बदली है और पुराने PF खाते की राशि नए खाते में transfer कर रहे हैं, तो यह वास्तविक निकासी नहीं मानी जाती। इसलिए, ऐसे ट्रांसफर पर TDS या टैक्स दोनों नहीं लगते।
बल्कि PF ट्रांसफर करने से आपकी सेवा अवधि लगातार मानी जाती है, जिससे भविष्य में 5 साल की शर्त पूरी करना आसान हो जाता है।
TDS बचाने के व्यावहारिक तरीके
अगर आपकी सेवा 5 साल से कम हुई है और आप बड़ी राशि (₹50,000 या उससे अधिक) निकालना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए तरीकों से आप टैक्स का बोझ कम कर सकते हैं:
- 5 साल की सेवा पूरी करें:
अगर संभव हो तो PF निकासी से पहले 5 साल की कुल सेवा अवधि पूरी होने तक इंतजार करें। पिछली नौकरियों की सेवा अवधि जोड़ने का ध्यान रखें – बस PF ट्रांसफर हुआ होना चाहिए। - Form 15G/15H जमा करें:
यदि आपकी कुल आय टैक्स फ्री लिमिट से कम है, तो ये फॉर्म भरकर EPFO को जमा करें। इससे आपकी निकासी पर कोई TDS नहीं लगेगा। - PAN कार्ड लिंक करें:
EPF खाते से PAN लिंक करना बहुत जरूरी है। अगर यह लिंक नहीं है, तो कम सेवा (5 साल से कम) पर TDS 10% की बजाय अधिकतम स्लैब रेट (लगभग 34.6%) तक लगाया जा सकता है। - निकासी को टालें या ट्रांसफर करें:
अगर नई नौकरी मिल गई है, तो अपने पुराने PF को निकालने की बजाय नए PF खाते में ट्रांसफर करें। इससे आपकी सेवा निरंतर मानी जाएगी और भविष्य में टैक्स-फ्री निकासी का फायदा मिलेगा।
एक आम उदाहरण से समझें
मान लीजिए रोहित ने 3 साल नौकरी की और PF में ₹75,000 जमा है। अगर वह अब PF निकालता है, तो उस पर TDS कट जाएगा क्योंकि सेवा 5 साल से कम है और राशि ₹50,000 से अधिक है।
लेकिन अगर रोहित नई नौकरी में PF ट्रांसफर कर देता है, तो यह निकासी नहीं मानी जाएगी। जब वह 5 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी करने के बाद PF निकालेगा, तो उसे टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
आखिर में ध्यान रखने योग्य बातें
- PF निकासी पर TDS लगना या न लगना आपकी सेवा अवधि और निकासी राशि पर निर्भर करता है।
- अगर आपकी स्थिति ऊपर बताए गए किसी भी छूट के अंतर्गत आती है, तो TDS की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
- Form 15G/15H का उपयोग सोच-समझकर करें और हमेशा अपनी टैक्स स्थिति का सत्यापन करें।
- EPFO पोर्टल पर PAN और आधार लिंक करना न भूलें — यह हर प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाता है।