पेंशन कम क्यों आती है? EPS पेंशन कैलकुलेशन की 4 सबसे बड़ी गलतियाँ

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कई रिटायर कर्मचारियों के मन में यह सवाल रहता है कि उनकी EPS (Employee Pension Scheme) पेंशन इतनी कम क्यों आती है। सच्चाई यह है कि इसका जवाब सिर्फ “कम सैलरी” नहीं, बल्कि कई तकनीकी नियमों, कैलकुलेशन और फॉर्मूला की बारीकियों में छिपा होता है।

अक्सर लोगों को उनकी पेंशन का सही हिसाब समझ में नहीं आता, जिसकी वजह से गलतफहमियां और निराशा बढ़ जाती है। आइए एक-एक करके उन कारणों को समझें जो आपकी पेंशन को सीधे प्रभावित करते हैं।

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1. सैलरी कैप यानी वेतन सीमा का असर

EPS पेंशन की गणना के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह रखी गई थी।
मतलब, अगर किसी व्यक्ति का वास्तविक बेसिक वेतन ₹30,000 या ₹50,000 भी था, तो भी पेंशन की गणना सिर्फ ₹15,000 के आधार पर होती थी।

इसलिए कई लोगों को लगा कि इतने सालों तक अच्छी सैलरी पर काम करने के बावजूद उनकी पेंशन बेहद कम क्यों आई। अगर आपने “Higher Pension Option” नहीं चुना, तो आपकी पेंशन अभी भी इसी 15,000 की सीमा में रहेगी।

2. सेवा अवधि कम होना

EPS में आपकी पेंशन राशि का सबसे बड़ा आधार है – आपकी कुल सेवा अवधि
अगर आपने 10 साल से कम नौकरी की है, तो आप मासिक पेंशन के पात्र ही नहीं बनते। वहीं, जिनकी सेवा अवधि लंबी है, उनकी पेंशन स्वतः बढ़ जाती है।

20 वर्ष से अधिक की सेवा पर सरकार की ओर से 2 बोनस वर्ष का लाभ भी मिलता है, जिससे पेंशन और बढ़ जाती है।

3. जल्दी रिटायरमेंट (Early Retirement) का असर

कई लोग 58 साल की उम्र से पहले — यानी 50 से 58 वर्ष के बीच — पेंशन लेना शुरू कर देते हैं।
ऐसे मामलों में हर साल के लिए मासिक पेंशन लगभग 4% कम हो जाती है।
मान लीजिए किसी ने 55 पर रिटायरमेंट ले लिया, तो तीन साल पहले पेंशन लेने के कारण उसकी राशि करीब 12% तक घट सकती है।

यह कटौती स्थायी होती है — यानी यह कमी आगे भी बरकरार रहती है।

4. PF और Pension फंड का पहले निकालना

नौकरी बदलते समय अगर आप हर बार अपना PF और Pension फंड निकाल लेते हैं, तो इससे आपकी कुल सेवा अवधि कट जाती है
पेंशन के हिसाब से यह बहुत नुकसानदेह होता है, क्योंकि पेंशन की गणना “कुल संचित सेवा” और “पेंशन योग्य वेतन” पर आधारित होती है।

इसलिए, अगर आप बार-बार पैसे निकालते हैं, तो आपकी योग्यता और पेंशन दोनों पर असर पड़ता है।

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EPS पेंशन कैलकुलेशन में आम गलतियाँ

अब बात करते हैं उन चार सबसे आम गलतियों की, जिनके कारण लोगों की पेंशन गलत या कम निकलती है।

1. पेंशन योग्य वेतन की गलत गणना

पहले, EPS पेंशन “आखिरी 12 महीनों” के औसत वेतन पर आधारित थी।
लेकिन 1 सितंबर 2014 के बाद यह नियम बदल गया और अब गणना आखिरी 60 महीनों के औसत वेतन पर होती है।
यहीं पर बहुत से लोग भ्रमित हो जाते हैं, क्योंकि इस नए नियम से औसत वेतन घटता है और पेंशन भी कम लगती है।

2. सेवा अवधि को नज़रअंदाज़ करना

कई लोग यह नहीं जानते कि पेंशन योग्य सेवा की गणना पूर्ण वर्ष के अनुसार की जाती है।
अगर किसी ने 9 साल 7 महीने काम किया, तो इसे 10 साल माना जाएगा।
लेकिन अगर 9 साल 4 महीने हैं, तो इसे सिर्फ 9 साल ही गिना जाएगा।
छोटी सी गलती या गलतफहमी पेंशन की पात्रता को पूरा न करने का कारण बन सकती है।

3. Higher Pension Option का चुनाव न करना

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद EPFO ने कर्मचारियों को “Higher Pension Option” का मौका दिया था, ताकि वे अपने पूरे वास्तविक वेतन पर योगदान कर सकें।
कई लोगों ने इस अवसर को नजरअंदाज कर दिया।
इसका नतीजा यह हुआ कि उनकी पेंशन ₹15,000 की कैप पर ही सीमित रह गई, चाहे वास्तविक वेतन इससे तीन या चार गुना अधिक क्यों न हो।

4. Non-Contributory Periods को शामिल करना

जब पेंशन योग्य वेतन का औसत निकाला जाता है, तो बीच के वे महीने जिनमें EPS में योगदान नहीं हुआ, उन्हें बाहर रखा जाना चाहिए।
ज्यादा लोग यही गलती करते हैं — पूरे 60 महीने गिन लेते हैं, जिनमें गैप वाले महीने भी शामिल होते हैं।
ऐसा करने से औसत वेतन कम हो जाता है और पेंशन भी घट जाती है।

EPS पेंशन को बेहतर बनाने के लिए क्या करें

  • नौकरी बदलते समय अपने PF और Pension फंड को ट्रांसफर करें, निकालें नहीं।
  • सुनिश्चित करें कि आपका वेतन और योगदान EPFO में सही तरह से अपडेट हो।
  • Higher Pension Option की पात्रता देखें और जरूरत हो तो उसे चुनें।
  • आखिरी पांच साल का पेंशन योग्य वेतन सही तरह से रिकॉर्ड करवाएं।

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