जॉब छूटने पर ग्रेच्युटी कब तक मिलती है? कंपनी देरी करे तो क्या करें?

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कई कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़ने या रिटायर होने के बाद ग्रेच्युटी का इंतज़ार करते रहते हैं, लेकिन सबको यह नहीं पता कि कानून इसके लिए सख्त समयसीमा तय करता है। ग्रेच्युटी केवल एक बोनस नहीं बल्कि कर्मचारी का कानूनी अधिकार है, जिसे नियोक्ता को निश्चित समय में देना अनिवार्य होता है।

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ग्रेच्युटी भुगतान की कानूनी समय सीमा

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के अनुसार, किसी भी कंपनी या नियोक्ता को कर्मचारी के नौकरी छोड़ने, सेवानिवृत्त होने या निधन की तारीख से 30 दिनों के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान करना होता है।

अगर यह भुगतान 30 दिनों के अंदर नहीं किया जाता है, तो कंपनी को उस राशि पर ब्याज देना पड़ता है। ब्याज दर आम तौर पर करीब 10 प्रतिशत सालाना होती है और यह तब तक लगती है जब तक कि भुगतान न हो जाए। इसका मतलब यह हुआ कि कंपनी सिर्फ वेतन या प्रोविडेंट फंड की तरह ग्रेच्युटी को भी समय पर देने की जिम्मेदार है, अन्यथा यह कानूनी उल्लंघन माना जाएगा।

अगर कंपनी देरी करे तो क्या करें

कभी-कभी कंपनियां जानबूझकर या लापरवाही से ग्रेच्युटी भुगतान में देरी कर देती हैं। अगर आपके साथ ऐसा होता है, तो आप नीचे दिए गए कदम उठा सकते हैं:

  1. कंपनी को लिखित नोटिस दें: सबसे पहले कंपनी के HR या फाइनेंस डिपार्टमेंट को एक औपचारिक नोटिस भेजें। इसमें अपने आखिरी कार्य दिवस, ग्रेच्युटी की पात्रता और लंबित भुगतान का विवरण जरूर लिखें।
  2. श्रम विभाग में शिकायत करें: अगर कंपनी से जवाब नहीं मिलता, तो अपने क्षेत्र के सहायक श्रम आयुक्त (Assistant Labour Commissioner) या जिला श्रम आयुक्त (District Labour Commissioner) से संपर्क करें।
  3. फॉर्म N दाखिल करें: श्रम कार्यालय में “कंट्रोलिंग अथॉरिटी” के समक्ष फॉर्म N के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है। यह कानूनी दस्तावेज़ आपके दावे को औपचारिक मान्यता देता है।
  4. कानूनी कार्रवाई करें: अगर ऊपर दिए सभी प्रयासों के बावजूद कंपनी भुगतान नहीं करती, तो आप एक वकील की मदद से कोर्ट में मुकदमा दर्ज कर सकते हैं। इसमें न केवल आपकी ग्रेच्युटी राशि बल्कि उस पर ब्याज और कभी-कभी जुर्माने की भी मांग की जा सकती है।

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ग्रेच्युटी न मिलने पर मिल सकता है ब्याज और जुर्माना

अगर यह साबित होता है कि कंपनी ने जानबूझकर ग्रेच्युटी के भुगतान में देरी की है, तो कंट्रोलिंग अथॉरिटी कंपनी को ब्याज के साथ पूरी राशि देने का आदेश दे सकती है। कुछ मामलों में नियोक्ता पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इसलिए कर्मचारियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और कंपनी से लिखित ट्रेल (written trail) बनाए रखें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

क्यों जरूरी है ग्रेच्युटी

ग्रेच्युटी किसी भी कर्मचारी के लंबे समय तक किए गए परिश्रम और निष्ठा का सम्मान है। यह रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का एक अहम साधन है। यही वजह है कि इसकी समय पर प्राप्ति न केवल कानूनी बल्कि नैतिक हक भी है।

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