कर्मचारी की सैलरी से कटता है ग्रेच्युटी का पैसा? जानें कौन करता है योगदान

does gratuity deduct from salary who contributes

कई कर्मचारियों को लगता है कि उनकी सैलरी से हर महीने कुछ हिस्सा ग्रेच्युटी के नाम पर काटा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि ग्रेच्युटी का पैसा कर्मचारी की जेब से नहीं, बल्कि कंपनी की तरफ से दिया जाता है। यह एक तरह का धन्यवाद है जो नियोक्ता अपनी कंपनी में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को प्रदान करता है।

यह भी देखें: EPS-95 पेंशनर्स को तोहफा, न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव, क्या सरकार मानेगी?

कौन देता है ग्रेच्युटी का योगदान

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के अनुसार, ग्रेच्युटी का पूरा वित्तीय बोझ नियोक्ता (employer) पर होता है। कर्मचारी को इसके लिए न तो कोई पैसा जमा करना पड़ता है और न ही उसकी मासिक सैलरी से कोई कटौती की जाती है।

यह एक मौद्रिक लाभ (monetary benefit) है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को उनके स्थायी योगदान के लिए एक आभार राशि के रूप में देती है। आमतौर पर यह लाभ तभी मिलता है जब कर्मचारी ने पांच वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी की हो।

CTC में ग्रेच्युटी दिखाई जाती है, लेकिन कटती नहीं

कई कंपनियां कर्मचारी के CTC (Cost To Company) स्ट्रक्चर में ग्रेच्युटी का कंपोनेंट दिखाती हैं। इससे कर्मचारियों में भ्रम पैदा होता है कि शायद उनके पैकेज से यह हिस्सा कट रहा है।
दरअसल, यह सिर्फ एक अकाउंटिंग एंट्री है जो नियोक्ता की भविष्य की देनदारी को दर्शाती है। इसका कर्मचारी की नेट सैलरी या वास्तविक इन-हैंड वेतन पर कोई असर नहीं पड़ता।

यह भी देखें: EPF Balance Check: बिना पासवर्ड के ऐसे करें पीएफ बैलेंस चेक, जानें आसान तरीका

PF और ग्रेच्युटी में बड़ा अंतर

कई लोग ग्रेच्युटी को प्रोविडेंट फंड (PF) से मिलाकर देखते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है।

  • PF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों हर महीने अंशदान करते हैं।
  • ग्रेच्युटी में केवल नियोक्ता योगदान करता है, कर्मचारी नहीं।
  • PF का पैसा नौकरी के दौरान भी निकाला जा सकता है, जबकि ग्रेच्युटी केवल जॉब छोड़ने, रिटायरमेंट या मृत्यु के बाद दी जाती है।

कंपनी कैसे करती है ग्रेच्युटी का भुगतान

कंपनी अपने फंड से सीधे ग्रेच्युटी का भुगतान कर सकती है, या फिर इसके लिए LIC जैसी इंश्योरेंस कंपनियों की ग्रुप ग्रेच्युटी स्कीम अपना सकती है।
दोनों ही स्थितियों में वित्तीय जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी की होती है। कर्मचारी को इस प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं देना पड़ता।

अगर कंपनी वेतन से ग्रेच्युटी काटे तो क्या करें

अगर किसी नियोक्ता द्वारा गलती से या जानबूझकर कर्मचारी की सैलरी से सीधे ग्रेच्युटी काटी जाती है, तो यह कर्मकानूनी रूप से गलत है। ऐसा करना ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। कर्मचारी चाहें तो इस पर श्रम आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

यह भी देखें: PF Interest Rate: मिनटों में ऐसे चेक करें अपने पीएफ पर मिला ब्याज, ये है पूरा प्रोसेस

Leave a Comment