
Employees’ Pension Scheme (EPS) में मौत के बाद पेंशन की स्थिति को लेकर कई लोग भ्रमित रहते हैं। अक्सर सवाल उठता है कि सदस्य की मृत्यु के बाद पेंशन तुरंत बंद हो जाती है या परिवार को वह पेंशन मिलती रहती है। इस लेख में EPS के नियमों के तहत मृत्यु के बाद पेंशन मिलने या बंद होने की पूरी जानकारी विस्तार से दी गई है।
EPS पेंशन क्या है?
EPS यानी Employees’ Pension Scheme एक सरकारी पेंशन योजना है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को सेवा के बाद नियमित मासिक पेंशन प्रदान करना है। यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जो न्यूनतम 10 वर्ष तक पेंशन फंड में योगदान करते हैं। पेंशन सामान्यतः 58 वर्ष की उम्र के बाद मिलने लगती है।
मृत्यु के बाद पेंशन का क्या नियम है?
- मृत्यु सेवा काल के दौरान होती है:
यदि सदस्य की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है और कम से कम एक महीने का योगदान EPS में जमा हो चुका है, तो सदस्य के परिवार को पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है। इस स्थिति में परिवार को सदस्य की मृत्यु की तारीख के अगले दिन से पेंशन मिलती है। - मृत्यु रिटायरमेंट से पहले होती है:
यदि सदस्य ने कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है और उसकी मृत्यु 58 वर्ष की रिटायरमेंट उम्र से पहले होती है, तो ऐसे में सदस्य के पति या पत्नी को सदस्य की मृत्यु के दिन मानकर पेंशन का पूरा भुगतान किया जाता है। मतलब, पति/पत्नी को वह पेंशन मिलेगी जो सदस्य को मिलने वाली थी यदि वह उसी दिन रिटायर हो जाता। - मृत्यु के बाद पेंशन शुरू हुई हो:
यदि सदस्य ने 58 वर्ष की आयु पूरी कर पेंशन लेना शुरू कर दिया था और उसके बाद मृत्यु हो जाती है, तो पति/पत्नी को सदस्य के पेंशन का 50% मासिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। - मृत्यु के बाद EPF राशि:
मृत्यु होने पर सदस्य का EPF बैलेंस परिवार को एकमुश्त भुगतान के रूप में मिल जाता है। यह पेंशन से अलग होता है।
पेंशन किसे कितनी मिलेगी?
- मृत्यु के पहले पेंशन शुरू न हुई हो तो पति/पत्नी को सदस्य की मृत्यु दिन के अनुसार पूरा पेंशन मिलेगा।
- मृत्यु के बाद पेंशन प्रारंभ हो चुकी हो तो पति/पत्नी को पेंशन राशि का आधा मिलेगा।
- बच्चों को भी पेंशन मिलती है, जो 25 वर्ष की आयु तक या यदि वे विकलांग हों तो जीवनभर मिल सकती है।
- न्यूनतम पत्नी की पेंशन राशि ₹1,000 प्रति माह तय है।
पेंशन लाभ कब शुरू होगा?
पति/पत्नी को पेंशन सदस्य की मृत्यु के अगले दिन से ही मिलनी शुरू हो जाती है, यानी उन्हें 58 वर्ष की सदस्य की उम्र तक इंतजार नहीं करना पड़ता। यदि सदस्य ने 10 वर्षों का योगदान दिया है तो पेंशन परिवार को तुरंत मिलती है।
पेंशन की राशि कैसे निर्धारित होती है?
पेंशन राशि सदस्य के सेवा काल, योगदान और अंतिम वेतन के आधार पर तय होती है। यदि मृत्यु और रिटायरमेंट उम्र के बीच अच्छा अंतर है तो पेंशन राशि कम हो सकती है क्योंकि यह उस दिन के हिसाब से तय होती है, जिस दिन सदस्य की मृत्यु हुई थी।