PF Withdrawal: नौकरी बदलने के बाद PF निकालने का प्रोसेस

PF Withdrawal: नौकरी बदलने के बाद PF निकालने का प्रोसेस
PF Withdrawal: नौकरी बदलने के बाद PF निकालने का प्रोसेस

नौकरी बदलते ही सबसे पहले यह तय करना होता है कि PF ट्रांसफर करें या निकालें। यदि नई नौकरी मिल चुकी है, तो PF को ट्रांसफर करना ज्यादा समझदारी है, क्योंकि पुराने फंड पर ब्याज चलता रहता है, सर्विस के साल जुड़ते हैं और आगे पेंशन-योग्यता व टैक्स-इफिशिएंसी बेहतर बनती है। दूसरी ओर, पूरी निकासी तब ही करें जब कम से कम दो महीने का बेरोज़गारी गैप हो या अचानक पैसों की वास्तविक जरूरत हो; वरना कंपाउंडिंग वाले फायदे छूट जाते हैं।

क्या-क्या पहले तैयार रखें

PF से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं सुचारू हों, इसके लिए UAN एक्टिव और KYC पूरा होना जरूरी है। आधार, PAN और बैंक अकाउंट (IFSC सहित) एक ही नाम/स्पेलिंग में हों, ताकि मैचिंग में दिक्कत न आए। सर्विस हिस्ट्री में पुरानी कंपनी की Date of Exit (DOE) दर्ज होनी चाहिए; अगर नहीं दिख रही, तो पहले उसे अपडेट करवाएं। बैंक पासबुक या कैंसल्ड चेक की साफ स्कैन कॉपी साथ रखें ताकि क्लेम के समय वेरिफिकेशन जल्दी हो।

ऑनलाइन PF निकालने का आसान तरीका

सबसे आसान तरीका EPFO सदस्य पोर्टल या UMANG ऐप से ऑनलाइन क्लेम करना है। लॉगिन के बाद प्रोफाइल में KYC स्टेटस “Verified” होना चाहिए; फिर Online Services सेक्शन में क्लेम ऑप्शन मिलता है। यहां बैंक अकाउंट कन्फर्म करने के बाद आवेदन शुरू होता है, जहां तीन विकल्प दिखते हैं—Full PF Settlement (Form 19), Pension Withdrawal Benefit (Form 10C) और PF Advance (Form 31)। जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनें, जो भी दस्तावेज़ मांगे जाएं, उन्हें अपलोड करें, और क्लेम सबमिट कर दें।

किन हालात में पूरी निकासी मिलती है

पूरी निकासी सामान्यतः तब मिलती है जब नौकरी छोड़ने के बाद कम-से-कम दो महीने तक बेरोज़गारी हो। अगर नई नौकरी तुरंत जॉइन कर ली है, तो नियमों के मुताबिक ट्रांसफर ही किया जाना चाहिए। कई बार एक महीने बाद 75% और दो महीने बाद शेष 25% निकासी का विकल्प भी देखने को मिलता है; लेकिन सबसे सुरक्षित और लाभकारी राह, नौकरी मिलने पर, ट्रांसफर ही है।

EPS (पेंशन) हिस्से के नियम

PF खाते में दो हिस्से होते हैं—EPF और EPS। अगर कुल मान्य सर्विस 10 साल से कम है, तो EPS पर Withdrawal Benefit लिया जा सकता है; लेकिन 10 साल या उससे अधिक सर्विस होने पर राशि निकालने के बजाय सर्विस-क्रेडिट पेंशन के लिए आगे कैरी होता है। इसलिए नौकरी बदलते समय EPS सर्विस कंटिन्युटी के लिए ट्रांसफर करवाना दीर्घकाल में लाभकारी रहता है।

टैक्स और TDS से जुड़े पॉइंट्स

यदि कुल कंटिन्यूस सर्विस 5 साल से कम है और पूरी निकासी कर रहे हैं, तो टैक्स लग सकता है और TDS भी कट सकता है। PAN अपडेटेड रखने से TDS अनावश्यक रूप से ज्यादा कटने से बचता है। 5 साल के बाद, नियमों के अनुसार टैक्स-इंसीडेंस कम या न के बराबर हो सकता है, इसलिए सर्विस कंटिन्युटी बनाए रखकर ट्रांसफर करना अक्सर टैक्स के लिहाज से बेहतर पड़ता है।

PF Advance (आंशिक निकासी) कब लें

PF Advance पूरी निकासी नहीं है—यह जरूरत-आधारित आंशिक निकासी है, जैसे मेडिकल इमरजेंसी, हायर एजुकेशन, शादी, घर खरीद/निर्माण, होम-लोन रीपेमेंट या प्राकृतिक आपदा। हर कारण की अलग सीमा, सर्विस शर्तें और दस्तावेज़ होते हैं। अगर पैसों की तुरंत जरूरत है, नौकरी भी चल रही है, तो PF Advance एक तेज़ और नियमबद्ध विकल्प बन सकता है।

आम रिजेक्शन और उनसे बचाव

कई क्लेम KYC मिसमैच, गलत IFSC, नाम/स्पेलिंग भिन्नता, या सर्विस हिस्ट्री में गलत DOE की वजह से रिजेक्ट होते हैं। आवेदन से पहले आधार, PAN और बैंक नाम एक जैसा करें; सर्विस हिस्ट्री चेक कर लें; और दस्तावेज़ साफ, पढ़ने योग्य फॉर्मेट में अपलोड करें। एक समय में एक ही सक्रिय क्लेम रखें—डुप्लिकेट से देरी और रिजेक्शन बढ़ते हैं।

ऑफलाइन कैसे करें

ऑनलाइन संभव न हो तो Composite Claim Form (Aadhaar/Non-Aadhaar) से ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। आधार-रूट में नियोक्ता अटेस्टेशन की जरूरत नहीं होती, जबकि नॉन-आधार रूट में नियोक्ता की मुहर/सिग्नेचर जरूरी हो सकते हैं। कुछ मामलों में 15G/15H फॉर्म भी लग सकते हैं, खासकर जब टैक्स-डिडक्शन से बचाव के लिए शर्तें पूरी होती हों।

किसे क्या चुनना चाहिए

नई नौकरी तुरंत जॉइन हो रही है, तो सबसे पहले पुराने PF को नए में ट्रांसफर करें—इससे कंपाउंडिंग चलती रहेगी और पेंशन-योग्यता मजबूत होगी। अगर वास्तविक जरूरत है और बेरोज़गारी गैप नियमों के मुताबिक पूरा होता है, तभी पूरी निकासी का विकल्प इस्तेमाल करें। जरूरत सीमित हो और नौकरी जारी हो, तो PF Advance लें यह फंड को खत्म किए बिना सहायता देता है।

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