
EPF Rules 2025: केंद्र सरकार द्वारा निजी क्षेत्र में काम करने वाले कमर्चारियों के लिए ईपीएफ योजना को शुरू किया गया है। इस योजना में कर्मचारी का पीएफ अकाउंट बनाया जाता है जिसमें हर महीने कर्मचारी की सैलरी से कुछ प्रतिशत हिस्सा कटकर जमा होता है। ठीक इतना ही पैसा आपकी कंपनी द्वारा इस अकाउंट में जमा किया जाता है । पीएफ कटौती के नियम EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) द्वारा जारी किए जाते हैं। आइए इन नियमों के बारे में डिटेल से जानते हैं।
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PF कटौती के प्रमुख नियम
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत, कर्मचारी की बेसिक सैलरी से हर महीने 12% हिस्सा कटकर पीएफ अकाउंट में जमा किए जाता है। ठीक कंपनी द्वारा भी 12% योगदान किया जाता है। दोनों का योगदान 24% जमा होता है। आपको यह पैसा पेंशन और कुछ शर्तों में दिया जाता है।
पेंशन फंड- आपके अकाउंट में हर महीने 24% हिस्सा जमा होता है ओट इसका 8.33% हिस्सा आपको रिटायरमेंट के बाद प्रति माह की पेंशन के रूप में मिलता है।
पीएफ फंड- इसके आलावा 15.67 हिस्सा पीएफ फंड में ही जमा रहता है। इस पैसे को निकालने के लिए आवश्यक शर्ते बनाई गई है। आप जरुरत पड़ने पर यह पैसा निकाल सकते हैं।
छोटी कंपनियों के लिए ये है नियम
हर कंपनियों में कर्मचारियों का पीएफ नहीं काटा जाता है। इसके लिए कुछ नियम शर्ते बनाई गई हैं। अगर किसी कंपनी में 20 से कम कर्मचारी हैं, तो इस स्थिति में कर्मचारी के वेतन से 10% हिस्सा काट कर पीएफ अकाउंट में जमा होता है और इसके साथ ही 10% योगदान नियोक्ता द्वारा दिया जाता है।
कर्मचारी और कंपनी का योगदान
आसान भाषा में कहें तो जितना हिस्सा कर्मचारी के महीने की सैलरी से कटता है ठीक उतना ही हिस्सा कंपनी को भी जमा करना पड़ता है। मान लीजिए यदि कर्मचारी का योगदान 15% है तो कंपनी का योगदान भी 15% ही रहेगा।
हालाँकि कर्मचारी के वेतन से 12% हिस्सा ही जमा होता है लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है। आप इससे ज्यादा हिस्से को VPF (स्वैछिक भविष्य निधि) सुविधा के तहत जमा कर सकते हैं। ईपीएफ में जैसे ब्याज और टैक्स के नियम निर्धारित है ठीक VPF में भी ऐसे ही है। लेकिन फिर इसमें कंपनी द्वारा कोई भी योगदान नहीं किया जाता है।
PF पर मिलने वाला ब्याज
ईपीएफ पेंशन स्कीन से जुड़े कर्मचारियों को पैसा जमा करने पर हर साल ब्याज दिया जाया है। 2023-24 के लिए यह दर 8.15 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस पर लगने वाला ब्याज साल के आखिर में अकाउंट में चढ़ाया जाता है।
यहाँ पर कुछ वर्षों की ब्याज दरें हैं।
- 2018-19- 8.65%
- 2019-20- 850%
- 2020-21- 850%
- 2021-22- 850%
- 2022-23- 8.15 %