
मुजफ्फरपु बेला औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों पहले बंद हो चुकी लेदर फिनिशिंग यूनिट के पूर्व कर्मचारी अपनी पेंशन चालू कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। पिछले डेढ़ साल से ये लोग रोज़गार से वंचित होकर सिर्फ पेंशन की उम्मीद में ईपीएफओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
लगातार दौड़धूप, फिर भी हल नहीं
बुधवार को भी इन कर्मचारियों का एक समूह कंपनीबाग रोड स्थित ईपीएफओ कार्यालय पहुंचा, उन्होनें आयुक्त से मिलकर अपनी पेंशन बहाल करनें की मांग की तो आयुक्त ने सुनवाई की बात तो कहीं, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं दिया।
2008 से संघर्ष की कहानी
कर्मचारियों का कहना है कि 2008 में अचानक इस यूनिट को बंद कर दिया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने एक लिक्विडेटर नियुक्त किया, जिनके सत्यापन के बाद पेंशन चालू हो पाई थी। लेकिन जुलाई 2022 से नियमों में बदलाव का हवाला देते हुए फॉर्म 10डी के सत्यापन पर रोक लगा दी गई।
नियम बदलने से अटका पेंशन
नए प्रावधान के अनुसार अब फॉर्म का सत्यापन राजपत्रित अधिकारी, मुखिया, बैंक अधिकारी या फिर ईपीएफओ आयुक्त द्वारा नामित अधिकारी से होना अनिवार्य है। पहले के आयुक्त मनीष मनी ने बैंक अधिकारी से सत्यापन कराकर पेंशन बहाल कर दी थी। मगर वर्तमान आयुक्त आलोक कुमार ने करीब डेढ़ साल पहले पेंशन रोक दी और अब तक बहाल नहीं की है।
आरटीआई का जवाब भी अधूरा
कर्मचारियों ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बताया जा रहा है कि करीब 15 कर्मचारियों का 10डी फॉर्म का सत्यापन लंबित है। इससे उनकी पेंशन पूरी तरह रुकी हुई है।
कर्मचारियों में आक्रोश
पेंशनर्स संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि बुजुर्ग कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। वे बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन समाधान दूर की बात लग रही है।