
अगर आप एक सैलरीड (salaried) कर्मचारी हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी स्लिप पर “PF Deduction” जरूर दिखाई देता होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब सिर्फ Provident Fund ही नहीं होता? भारत में सरकार ने ऐसी कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाई हैं, जो कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करती हैं — खासकर रिटायरमेंट या किसी आपात स्थिति में।
PF के अलावा, तीन और महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएँ हैं जो हर कर्मचारी को जाननी चाहिए: Gratuity, Pension (EPS) और ESI (Employees’ State Insurance)।
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1. ग्रेच्युटी (Gratuity)
ग्रेच्युटी एक तरह का ‘थैंक यू पेमेंट’ है, जो नियोक्ता (Employer) अपने कर्मचारी को उसकी लंबी सेवा के आभारस्वरूप देता है। इसकी कानूनी नींव Payment of Gratuity Act, 1972 में रखी गई है।
अगर आपने किसी एक कंपनी में कम से कम पाँच साल काम किया है, तो कंपनी पर यह अनिवार्य है कि वह आपकी सेवा के बदले यह एकमुश्त राशि (लंप सम पेमेंट) दे।
ग्रेच्युटी की राशि कर्मचारी के अंतिम वेतन और कुल सेवा वर्षों पर निर्भर होती है।
उदाहरण के लिए, जैसे-जैसे आपकी बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस (DA) बढ़ते हैं, वैसे-वैसे आपकी ग्रेच्युटी की राशि भी बढ़ती है। यह एक सुरक्षित फाइनेंशियल बफर बन जाती है, खासकर रिटायरमेंट के समय।
2. पेंशन योजना (EPS – Employees’ Pension Scheme)
Employee’s Pension Scheme, EPF खाते से ही जुड़ी होती है। जब आपका नियोक्ता आपके PF में योगदान करता है (यानी 12%), तो उसमें से 8.33% हिस्सा सीधे आपकी पेंशन फंड में चला जाता है।
इस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद नियमित आय उपलब्ध कराना है। इसके लिए कम-से-कम 10 साल की सतत सेवा आवश्यक होती है। एक बार आप 58 वर्ष की आयु पर पहुँच जाते हैं, तो आपको मासिक पेंशन मिलने लगती है – जो आपके कार्यकाल के दौरान जमा हुए फंड और आपकी अंतिम सैलरी पर निर्भर होती है।
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अगर किसी कारणवश कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को फैमिली पेंशन का लाभ भी मिलता है। यानी यह योजना न सिर्फ आपके लिए, बल्कि आपके परिवार के लिए भी सुरक्षा का सहारा है।
3. कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI)
अब बात करते हैं उस योजना की जो स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी है – Employee’s State Insurance (ESI)।
अगर आपकी सैलरी ₹21,000 प्रति माह से कम है, तो यह योजना आपके लिए अपने आप लागू हो जाती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता – दोनों का योगदान आवश्यक होता है।
ESI सिर्फ मेडिकल बेनिफिट नहीं देती, बल्कि एक विस्तृत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली है। इसके तहत कर्मचारी और उसके परिवार को मिलते हैं:
- सरकारी अस्पतालों और ESI डिस्पेंसरियों में फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट
- बीमारी के दौरान मेडिकल लीव और आर्थिक सहायता
- गर्भावस्था या डिलीवरी के समय मातृत्व लाभ (Maternity Benefits)
- अशक्तता (Disability) या मृत्यु की स्थिति में भी वित्तीय सहायता
यह योजना साबित करती है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य सिर्फ आय सुरक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन सुरक्षा है।
क्यों ज़रूरी हैं ये सुविधाएँ?
इन तीनों योजनाओं—PF, Gratuity, EPS और ESI—को मिलाकर देखा जाए, तो ये किसी कर्मचारी के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल तैयार करती हैं।
- Gratuity आपके भविष्य के लिए इमरजेंसी फंड बनाती है।
- EPS रिटायरमेंट के बाद स्थिर आमदनी का स्त्रोत है।
- और ESI आपकी और आपके परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा ढाल है।
इन योजनाओं का मकसद है कि आप न केवल काम के दौरान बल्कि अपने पूरे जीवन भर आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें। इसलिए, अगली बार अपनी सैलरी स्लिप पर ‘कटौती’ देखकर परेशान होने की बजाय, इसे अपनी फाइनेंशियल सेफ्टी नेट का हिस्सा मानें।
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